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दूध की खरीद 50% तक बढाई जाएगी

भारत सरकार ने दुग्ध क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है, जिसे सफेद क्रांति 2.0 (White Revolution 2.0) नाम दिया गया है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में दुग्ध संग्रहण में 50 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। मूल सफेद क्रांति, जिसे 1970 के दशक में शुरू किया गया था, ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाया था। अब इस नई संस्करण में आधुनिक तकनीकों और सहकारी संस्थाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि छोटे किसानों और भूमिहीन लोगों को अधिक लाभ मिल सके।

इस योजना के अंतर्गत सरकार ने दो लाख बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य रखा है, जिनमें से अब तक लगभग 35 हजार से अधिक समितियां बनाई जा चुकी हैं। इन समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, संग्रहण और विपणन को सुव्यवस्थित किया जाएगा। इसके अलावा, 15 हजार से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं, जबकि 11 हजार से ज्यादा मौजूदा समितियों को मजबूत बनाया गया है। इन प्रयासों से दुग्ध क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में सुधार होगा। सरकार का मानना है कि सहकारी संस्थाओं को व्यावसायिक इकाइयों में बदलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

सफेद क्रांति 2.0 के तहत अन्य महत्वपूर्ण कदम भी उठाए जा रहे हैं। छोटे किसानों के साथ पारंपरिक बीजों के लिए अनुबंध किए जाएंगे, जिससे उन्हें बेहतर बाजार और मूल्य मिल सके। साथ ही, राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (National Dairy Development Board) और विभिन्न राज्यों की दुग्ध संघों ने बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौते किए हैं। ये संयंत्र दुग्ध सहकारिताओं में लगाए जाएंगे, जो पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन में योगदान देंगे। तीन राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाएं भी स्थापित की गई हैं: राष्ट्रीय सहकारी जैविक लिमिटेड (National Cooperative Organic Limited), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (National Cooperative Export Limited) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (Bharatiya Beej Sahkari Samiti Limited)। ये संस्थाएं निर्यात, जैविक उत्पादन और बीज वितरण को बढ़ावा देंगी।

पिछले चार वर्षों में सहकारी क्षेत्र में 100 से अधिक पहलें की गई हैं, जिनमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (Primary Agricultural Credit Societies), मत्स्य पालन, सहकारी बैंक और चीनी सहकारिताएं शामिल हैं। डिजिटल सुधार, नीतिगत बदलाव और वित्तीय सहायता से इन क्षेत्रों को मजबूत बनाया गया है। राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 (National Cooperative Policy-2025) एक रोडमैप प्रदान करती है, जो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) और राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम (National Dairy Development Program) जैसी योजनाओं के साथ समन्वय करेगी। इसके अलावा, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (Tribhuvan Sahkari University) की स्थापना की गई है, जो सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था होगी।

कुल मिलाकर, सफेद क्रांति 2.0 ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और सहकारी क्षेत्र अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनेगा। राज्य स्तर पर भी दुग्ध क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि यह योजना पूरे देश में सफल हो सके।