तामिलनाडू (Tamil Nadu) सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, घर-घर तक भोजन और अन्य सामग्री पहुंचाने वाले लगभग 50,000 डिलीवरी वर्कर्स के लिए एक दुर्घटना बीमा योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्य रूप से उन कामगारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है जो काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं का शिकार हो सकते हैं। राज्य विधानसभा में घोषित इस योजना को प्रीमियम भुगतान की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए लागू किया जाएगा, जिससे इन कामगारों की सुरक्षा और कल्याण को मजबूती मिलेगी।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स जैसे जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) की लोकप्रियता बढ़ने से डिलीवरी वर्कर्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। ये कामगार अक्सर समय की दबाव में वाहनों से तेज गति से यात्रा करते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। तामिलनाडू (Tamil Nadu) जैसे राज्यों में जहां शहरीकरण तेज है, वहां ऐसे कामगारों की संख्या लाखों में है। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो, गिग इकोनॉमी (gig economy) के विकास ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है। कई राज्यों ने इसी तरह की योजनाएं शुरू की हैं, जैसे कि राजस्थान और कर्नाटक में डिलीवरी वर्कर्स के लिए कल्याण बोर्ड की स्थापना, लेकिन तामिलनाडू (Tamil Nadu) की यह योजना विशेष रूप से दुर्घटना बीमा पर केंद्रित है जो इन कामगारों को तत्काल राहत प्रदान कर सकती है।
योजना के तहत, यदि कोई कामगार काम के दौरान दुर्घटना में अपनी जान गंवा देता है, तो उसके परिवार को 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। गंभीर विकलांगता के मामलों में, जैसे कि दोनों हाथों, दोनों पैरों या दोनों आंखों की दृष्टि का नुकसान, भी 5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं, आंशिक विकलांगता, जैसे कि एक हाथ, एक पैर या एक आंख की दृष्टि का नुकसान होने पर, 2.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। यह बीमा योजना ऑनलाइन पंजीकरण वाली कंपनियों के कर्मचारियों पर लागू होगी, जो मुख्य रूप से फूड डिलीवरी और अन्य होम डिलीवरी सेवाओं से जुड़े हैं।
इस योजना को लागू करने के लिए तामिलनाडू (Tamil Nadu) सरकार ने कुल 66.95 लाख रुपये का बजट आवंटित किया है। इसमें प्रीमियम के रूप में 52.5 लाख रुपये शामिल हैं, जो प्रति कामगार 105 रुपये की दर से निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, 18 प्रतिशत जीएसटी (GST) के रूप में 9.45 लाख रुपये और विज्ञापनों तथा अन्य गतिविधियों के लिए 5 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। श्रम कल्याण और कौशल विकास विभाग (Labour Welfare and Skill Development Department) ने इस ग्रुप इंश्योरेंस प्लान (group insurance plan) को लागू करने के आदेश जारी किए हैं। यह कदम इन कामगारों के लिए एक कल्याण बोर्ड स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके गठन के बाद औपचारिक रूप से धनराशि की मंजूरी ली जाएगी।
यह पहल न केवल डिलीवरी वर्कर्स की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए एक उदाहरण भी स्थापित करती है। भविष्य में, ऐसी योजनाओं का विस्तार अन्य राज्यों में भी हो सकता है, जिससे गिग इकोनॉमी (gig economy) में काम करने वालों की स्थिति में सुधार आएगा। सरकार का यह प्रयास दिखाता है कि कैसे राज्य स्तर पर नीतियां बनाकर कामगारों के जोखिमों को कम किया जा सकता है, जिससे समाज में समानता और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है।