हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पौंग बांध (Pong Dam) का जल स्तर लगातार बढ़ने से खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ा दी है।
पिछले 24 घंटों में जल स्तर में लगभग पांच फीट की वृद्धि दर्ज की गई है, जो शनिवार को 1361.07 फीट से बढ़कर रविवार सुबह 1365.26 फीट हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले दो दिनों तक यह प्रवृत्ति जारी रही, तो बांध के फ्लड गेट्स (flood gates) खोलने पड़ सकते हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
पौंग बांध, जिसे महाराणा प्रताप सागर (Maharana Pratap Sagar) के नाम से भी जाना जाता है, व्यास नदी (Beas River) पर बना एक प्रमुख बहुउद्देशीय बांध है। यह बांध सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कुल क्षमता लगभग 1410 फीट है, जबकि अधिकतम सीमा 1420 फीट तक जाती है।
वर्तमान में, बांध में पानी का प्रवाह 125099 क्यूसेक (cusecs) दर्ज किया जा रहा है, जबकि व्यास नदी और शाह नहर (Shah Canal) में छह टरबाइनों (turbines) के माध्यम से केवल 16500 क्यूसेक पानी ही निकाला जा रहा है। प्रत्येक टरबाइन 210 मेगावाट (megawatts) बिजली उत्पादन करने में सक्षम है, लेकिन बढ़ते जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए यह पर्याप्त नहीं साबित हो रहा है।
इस बढ़ते जल स्तर का मुख्य कारण हाल की भारी बारिश है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक वर्षा की संभावना जताई है, जो बांध पर दबाव बढ़ा सकती है। यदि जल स्तर 1380 फीट के आसपास पहुंचता है, तो अतिरिक्त पानी निकालने के लिए फ्लड गेट्स खोलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
इससे व्यास नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरतते हुए कांगड़ा (Kangra) और होशियारपुर (Hoshiarpur) जिलों के अधिकारियों को अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां भी तैयारियों में जुट गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पौंग बांध का निर्माण 1970 के दशक में पूरा हुआ था और यह हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब के लिए महत्वपूर्ण जल संसाधन है। यह न केवल कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान करता है, बल्कि बिजली उत्पादन से क्षेत्रीय विकास में योगदान देता है।
हालांकि, जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा पैटर्न के कारण ऐसे बांधों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे समय-समय पर ऐसी चुनौतियां सामने आती रहती हैं। स्थानीय निवासियों को सलाह दी गई है कि वे नदी के किनारे से दूर रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। यह घटना जल प्रबंधन की महत्वपूर्णता को रेखांकित करती है, जहां संतुलित पानी निकासी और पूर्वानुमान आवश्यक हैं।