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भारत में भारी बारिश के बीच आईएमडी की कृषि मौसम सलाह: किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

परिचय

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने 6 अगस्त 2025 को विभिन्न राज्यों के किसानों के लिए कृषि मौसम सलाह (Agromet Advisories) जारी की है। ये सलाहें भारी बारिश के कारण होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए दी गई हैं, जैसे कि जलभराव, फसलों की क्षति और बुवाई में देरी। भारत में मानसून का मौसम किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन अत्यधिक वर्षा से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। आईएमडी (IMD) द्वारा जारी ये दिशानिर्देश किसानों को समय पर कदम उठाने में मदद करते हैं, जिससे उत्पादन में कमी को रोका जा सके। देश के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में हाल की भारी बारिश को देखते हुए ये सलाहें विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

उत्तराखंड के किसानों के लिए सलाह

उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण काले उड़द (Black Gram), हरी उड़द (Green Gram) और सोयाबीन (Soybean) की बुवाई को तब तक स्थगित रखने की सलाह दी गई है जब तक बारिश थम न जाए। भाभर (Bhabar) और तराई (Tarai) क्षेत्र में पहले से बोई गई या रोपी गई धान (Rice), गन्ना (Sugarcane), मक्का (Maize), काले उड़द, हरी उड़द, मूंगफली (Groundnut), अरहर (Pigeon Pea), मंडुआ (Finger Millet), सोयाबीन और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें ताकि जलभराव न हो। उप-आर्द्र उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Sub Humid Sub Tropic Zone) में धान की रोपाई तब तक टालें जब तक अतिरिक्त पानी कम न हो जाए। यदि रोपी गई धान के पौधों को नुकसान पहुंचा है, तो पुराने पौधों से देर से या चरणबद्ध रोपाई करें। यदि धान की फसल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है, तो अनुकूल मिट्टी की नमी में कम अवधि वाली किस्मों से सीधी बुवाई करें। धान, हरी उड़द, काले उड़द, ज्वार (Barnyard Millet) और मंडुआ के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें। पहाड़ी क्षेत्र (Hill Zone) में पानी के सतही बहाव को रोकने के लिए बांधों को मजबूत करें। अत्यधिक गीली मिट्टी में सब्जी मटर (Vegetable Pea) की बुवाई स्थगित करें। फसल के खेतों में उचित जल निकासी चैनल बनाए रखें।

हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए सलाह

हिमाचल प्रदेश के उच्च पहाड़ी उप-समशीतोष्ण आर्द्र क्षेत्र (High Hills Sub Temperate Wet Zone) में भारी बारिश से फूलगोभी (Cauliflower) की नर्सरी को प्लास्टिक शीट से ढकें ताकि क्षति न हो। मध्य पहाड़ी उप-आर्द्र क्षेत्र (Mid Hills Sub Humid Zone) में मक्का, अदरक (Ginger) और सब्जी के खेतों में उचित जल निकासी चैनल बनाएं। उप-पर्वतीय और निचले पहाड़ी उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Sub Montane and Low Hills Sub Tropical Zone) में धान, मक्का, दालें (Pulses) और सब्जी के खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करें। उच्च पहाड़ी उप-समशीतोष्ण आर्द्र क्षेत्र में राजमा (Kidney Beans), मंडुआ, ककड़ी परिवार की सब्जियां (Cucurbits) और अन्य सब्जियों में जल निकासी बनाएं।

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए सलाह

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (Western Plain Zone) में अरहर की बुवाई स्थगित करें और धान, मक्का, काले उड़द, हरी उड़द और सब्जियों के खेतों में उचित जल निकासी प्रदान करें। मध्य मैदानी क्षेत्र (Central Plain Zone) में धान, मक्का, मूंगफली, तिल (Sesame), काले उड़द, हरी उड़द और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें।

अरुणाचल प्रदेश के किसानों के लिए सलाह

अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश थमने तक सभी नई बुवाई और रोपाई कार्य स्थगित करें। लगभग पके केले (Banana) के गुच्छों को काटकर सूखी और सुरक्षित जगह पर पकने के लिए रखें। धान, मक्का, मंडुआ, सोयाबीन, सब्जियों और फलों के बागों में जल निकासी सुनिश्चित करें ताकि जलभराव न हो। धान के खेतों में खेतों की मिट्टी कटाव और पौधों के बहने से बचाने के लिए बांधों को मजबूत करें। फल देने वाले पौधों को मजबूत सहारा दें ताकि भारी बारिश में वे झुकें या टूटें नहीं।

असम के किसानों के लिए सलाह

असम के निचले ब्रह्मपुत्र घाटी क्षेत्र (Lower Brahmaputra Valley Zone) में साली धान (Sali Rice), हरी उड़द और अरहर के खेतों तथा केले के बागों में जल निकासी सुनिश्चित करें। उत्तर बैंक मैदानी क्षेत्र (North Bank Plain Zone) में साली धान और गन्ना के खेतों में जल निकासी बनाएं। ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी क्षेत्र (Upper Brahmaputra Valley Zone) और बराक घाटी क्षेत्र (Barak Valley Zone) में साली धान के खेतों में जल निकासी करें। पहाड़ी क्षेत्र (Hill Zone) में धान और तिल के खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करें। बराक घाटी क्षेत्र में फूलगोभी की बुवाई स्थगित करें।

मेघालय के किसानों के लिए सलाह

मेघालय में धान, मक्का, हल्दी (Turmeric), मिर्च (Chilli), भिंडी (Okra) और करेला (Bitter Gourd) के खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करें ताकि जलभराव न हो। केला, पपीता (Papaya), लौकी (Bottle Gourd) जैसे लंबे और नाजुक फसलों को सहारा दें ताकि वे गिरें नहीं।

नागालैंड के किसानों के लिए सलाह

नागालैंड में मक्का के खेतों में सतही पानी के बहाव को प्रबंधित करने के लिए उचित जल निकासी चैनल प्रदान करें। धान के खेतों में जल निकासी चैनलों को साफ करें ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके।

त्रिपुरा के किसानों के लिए सलाह

त्रिपुरा में धान, मिर्च और अदरक के खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए सलाह

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र (Hill Zone) में धान, अदरक, सब्जी के खेतों और फलों के बागों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें। तराई क्षेत्र (Terai Zone) में अमन धान (Aman Paddy) और सब्जी के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें। तराई क्षेत्र में मिर्च के पौधों को भारी बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक से ढकें।

बिहार के किसानों के लिए सलाह

बिहार के उत्तर पश्चिमी जलोढ़ मैदानी क्षेत्र (North West Alluvial Plain Zone) में मक्का, प्याज (Onion), मिर्च और फूलगोभी की नर्सरी जैसे खड़ी फसलों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें। उत्तर पूर्वी जलोढ़ क्षेत्र (North East Alluvial Zone) में मक्का, मंडुआ, रागी (Ragi), कोदो (Kodo), सावा (Sava), चीना (China) आदि से अतिरिक्त पानी निकालें।

केरल के किसानों के लिए सलाह

केरल में धान, नारियल (Coconut), केला और अदरक के खेतों में पर्याप्त जल निकासी प्रदान करें। केले के बागानों को सहारा दें। सब्जी के पंडालों को मजबूत बनाएं।

तमिलनाडु के किसानों के लिए सलाह

तमिलनाडु में ज्वार (Sorghum) के खेतों में, विशेष रूप से भारी मिट्टी और निचले इलाकों में जल निकासी सुनिश्चित करें ताकि जलभराव न हो। नारियल के पौधों के आसपास उचित जल निकासी बनाएं ताकि जड़ सड़न न हो।

कर्नाटक के किसानों के लिए सलाह

कर्नाटक के तटीय क्षेत्र (Coastal Zone) में सुपारी (Arecanut) और केले के बागानों में पर्याप्त जल निकासी सुविधाएं प्रदान करें। दक्षिणी संक्रमण क्षेत्र (Southern Transition Zone) में भारी बारिश थमने तक धान की रोपाई टालें और अदरक, मक्का, मंडुआ, रोपी गई धान के खेतों तथा सुपारी और नारियल के बागानों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। दक्षिणी शुष्क क्षेत्र (Southern Dry Zone) में धान, गन्ना और सब्जी के खेतों में जल निकासी चैनलों को साफ और बनाए रखें। केला, मक्का और सूरजमुखी (Sunflower) जैसे लंबे फसलों को सहारा दें ताकि वे टूटें या गिरें नहीं।

पशुधन और मत्स्य पालन पर सलाह

भारी बारिश के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित चारा प्रदान करें। चारे और भूसे को सुरक्षित जगह पर संग्रहित करें ताकि वे खराब न हों। तालाबों के चारों ओर उचित जाली वाली निकासी बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकलने पर मछलियां बाहर न निकलें।