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हाड़ौती में भारी बारिश से किसानों की फसलें तबाह 15 प्रतिशत क्षति का अनुमान

राजस्थान (Rajasthan) के हाड़ौती (Hadoti) क्षेत्र में हाल ही में हुई भारी बारिश ने किसानों को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस क्षेत्र में लगातार वर्षा के कारण खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कृषि उत्पादन में बड़ी हानि का अनुमान लगाया जा रहा है। हाड़ौती संभाग, जो बूंदी (Bundi), कोटा (Kota), बारां (Baran) और झालावाड़ (Jhalawar) जिलों को शामिल करता है, राजस्थान की कृषि प्रधान क्षेत्रों में से एक है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, जहां मानसून की बारिश फसलों के लिए जीवनदायिनी होती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा पानी भराव और फसल क्षति का कारण बन जाती है।

इस वर्ष की शुरुआत में ही मानसून ने राज्य में दस्तक दी, लेकिन प्रारंभिक बारिश ने बुवाई की प्रक्रिया को प्रभावित किया। राज्य सरकार ने हाड़ौती में कुल 12.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर बुवाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन वास्तविक बुवाई केवल 11.04 लाख हेक्टेयर पर ही हो सकी। सोयाबीन (Soybean) और उड़द (Urad) जैसी फसलों की बुवाई लक्ष्य से काफी कम रही, जहां सोयाबीन का क्षेत्र लक्ष्य का मात्र 79 प्रतिशत और उड़द का 48 प्रतिशत ही कवर हो सका। वहीं, मक्का (Maize) और धान (Paddy) की बुवाई लक्ष्य से अधिक हुई। यह स्थिति किसानों के लिए पहले से ही चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि कम बुवाई का मतलब कम उत्पादन और आय में कमी होता है।

अब, हाल की भारी बारिश ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों में सड़न शुरू हो गई है, और अनुमान है कि लगभग 15 प्रतिशत फसलें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सोयाबीन फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई है, उसके बाद उड़द, मक्का और धान का नंबर आता है, हालांकि धान में क्षति 10 प्रतिशत से कम बताई जा रही है। पानी भराव के कारण बीजों का अंकुरण रुक गया है, और फसलों की जड़ें कमजोर पड़ गई हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट की संभावना है। राजस्थान जैसे सूखा प्रभावित राज्य में कृषि मानसून पर निर्भर करती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा पैटर्न किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। हाड़ौती क्षेत्र में सोयाबीन और उड़द जैसी नकदी फसलें स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार हैं, और इनकी क्षति से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है, जिससे कर्ज और गरीबी का चक्र गहरा सकता है।

किसान इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं और उन्होंने क्षति का आकलन जल्द करने की मांग की है। राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए प्रत्येक जिले में संयुक्त निदेशकों की अगुवाई में समितियां गठित की हैं। ये समितियां क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर रही हैं और रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजी जाएगी, जिसके आधार पर राहत उपाय तय किए जा सकते हैं। ऐसे में, किसानों को सरकारी सहायता की उम्मीद है, जैसे कि बीमा दावे या मुआवजा, जो उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद कर सकता है। कुल मिलाकर, यह घटना राजस्थान की कृषि चुनौतियों को उजागर करती है, जहां मौसम की अनिश्चितता से निपटने के लिए बेहतर जल प्रबंधन और फसल बीमा योजनाओं की जरूरत है।