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खरीफ फसल बीमा की अंतिम तिथि 30 अगस्त तक : छत्तीसगढ़ के किसानों को मिली बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) के तहत खरीफ मौसम 2025-26 के लिए फसल बीमा की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है। यह विस्तार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। मूल रूप से, यह योजना 1 जुलाई 2025 से 31 जुलाई 2025 तक निर्धारित थी, लेकिन अब गैर-ऋणी किसानों के लिए 14 अगस्त 2025 तक और ऋणी किसानों के लिए 30 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी गई है। इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां बारिश की अनियमितता या अन्य मौसमी चुनौतियां फसलों को प्रभावित करती हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जो 2016 में शुरू की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य किसानों को सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि (hailstorm), जलभराव (waterlogging) और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ बीमा कवर प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत, किसान न्यूनतम प्रीमियम का भुगतान करके अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं, जबकि शेष राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि-प्रधान राज्य में, जहां धान (paddy), मक्का (maize), सोयाबीन (soybean) और अन्य फसलें प्रमुख हैं, यह योजना किसानों की आय स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राज्य में कृषि विभाग और सहकारी समितियां इस योजना को लागू करने में सक्रिय हैं, और इस वर्ष धमतरी (Dhmatari) जिले में भारतीय कृषि बीमा कंपनी (Indian Agricultural Insurance Company) को कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस विस्तारित अवधि में, गैर-ऋणी किसान आधार कार्ड (Aadhaar card), बैंक पासबुक (bank passbook), बी-1 खसरा (B-1 khasra) और बोआई प्रमाणपत्र (sowing certificate) जैसे दस्तावेजों के साथ कृषि या राजस्व कार्यालयों, सहकारी समितियों या सामान्य सेवा केंद्रों (Common Service Centers – CSC) के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले या नवीनीकरण करने वाले ऋणी किसान स्वतः योजना में शामिल हो जाते हैं। बीमाकृत फसलों में सिंचित और असिंचित धान, मक्का, सोयाबीन, अरहर (pigeon pea), मूंग (green gram), कोदो (kodo), कुटकी (kutki), रागी (finger millet), मूंगफली (groundnut) और उड़द (black gram) शामिल हैं। प्रीमियम दरें प्रति हेक्टेयर के आधार पर निर्धारित हैं, जैसे सिंचित धान के लिए 1200 रुपये, असिंचित धान के लिए 900 रुपये, मक्का के लिए 920 रुपये और अन्य फसलों के लिए समान रूप से कम दरें।

योजना के लाभों में बोआई से लेकर कटाई के बाद तक के नुकसान को कवर करना शामिल है, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं के अलावा कीट हमले या अन्य अप्रत्याशित घटनाएं भी आती हैं। किसान आपदा की स्थिति में 72 घंटों के भीतर टोल-फ्री नंबर (toll-free number) 1800-419-0344 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिससे दावा प्रक्रिया शुरू होती है। कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारी जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस अवसर का लाभ उठा सकें। यह कदम न केवल वर्तमान मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने में मदद करेगा, बल्कि लंबे समय में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाएगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ में लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। सरकार की यह पहल किसानों के बीच विश्वास बढ़ाने और उत्पादकता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।