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आगरा में बनेगा अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र

उत्तर प्रदेश राज्य में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आगरा (Agra) शहर को ट्यूबर फसलों (tuber crops) की नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (International Potato Centre) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (South Asia Regional Centre – CSARC) स्थापित किया जा रहा है, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह केंद्र न केवल आलू (potato) बल्कि अन्य ट्यूबर फसलों जैसे शकरकंद (sweet potato) पर शोध और विकास को बढ़ावा देगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और निर्यात अवसरों का विस्तार होगा।

अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की स्थापना 1971 में पेरू (Peru) में हुई थी और यह संगठन भारत में पिछले पचास वर्षों से सक्रिय है। यह केंद्र जलवायु अनुकूलित किस्मों (climate-resilient varieties), कीट प्रबंधन (pest management) और पौष्टिक फसलों (nutritious crops) के क्षेत्र में शोध करता है, तथा बीस से अधिक देशों में अपनी गतिविधियां चला रहा है। भारत में आलू उत्पादन की चुनौतियों को देखते हुए, इस केंद्र का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र आगरा के सिगनवा गांव (Siganva village) में बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने जून 2025 में इस परियोजना के लिए 111.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जो बीज नवाचार (seed innovation), जर्मप्लाज्म संरक्षण (germplasm conservation) और मूल्य श्रृंखला विस्तार (value chain expansion) पर ध्यान केंद्रित करेगी।

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है, जहां कुल राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा आता है। राज्य में लगभग 6.96 लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है, और आगरा जिले में ही 76,000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। हालांकि, गुणवत्ता वाले बीजों की कमी और प्रसंस्करण योग्य किस्मों (processing varieties) की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं किसानों के सामने बनी हुई हैं। इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र के निर्माण पूरा होने तक मौजूदा कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीकों से प्रशिक्षित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने अन्य ट्यूबर फसलों पर भी शोध बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि उत्पादन में सुधार हो और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।

यह परियोजना राज्य की प्रसंस्करण उद्योग (processing industry) को भी मजबूत करेगी, जिससे किसानों की आय में सीधा लाभ होगा। केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research – ICAR), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और निजी उद्यमों के साथ सहयोग करेगा, जो तकनीकी हस्तांतरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करेगा। जुलाई 2025 में भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के बीच समझौता ज्ञापन (Memorandum of Agreement – MoA) पर हस्ताक्षर होने से इस परियोजना को औपचारिक रूप मिला है। एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर निर्माण कार्य की प्रगति पर चर्चा की, जो राज्य को दक्षिण एशिया का आलू नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, यह पहल उत्तर प्रदेश को कृषि नवाचार के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेगी। ट्यूबर फसलों की उन्नत किस्मों और तकनीकों से न केवल स्थानीय किसान लाभान्वित होंगे, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। राज्य सरकार की यह रणनीति कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में एक मिसाल कायम करेगी।