केरल (Kerala) राज्य में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department – IMD) द्वारा जारी की गई भारी वर्षा की चेतावनी के अनुसार, अगले पांच दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में तीव्र वर्षा जारी रहने की संभावना है।
जिसमें कुछ जिलों में बहुत भारी बारिश (very heavy rainfall) होने का अनुमान है, जो 20 सेंटीमीटर से अधिक हो सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी वर्षा (heavy rainfall) 6 से 20 सेंटीमीटर तक पहुंच सकती है; इस मौसम की स्थिति दक्षिणी तमिलनाडु (southern Tamil Nadu) के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) और पश्चिमी से उत्तर-पश्चिमी दिशा में बहने वाली तेज हवाओं के कारण उत्पन्न हुई है, जो केरल के वातावरण को प्रभावित कर रही हैं और राज्य की भौगोलिक संरचना को देखते हुए, जहां पहाड़ी इलाके और तटीय क्षेत्र प्रमुख हैं, इस तरह की वर्षा अक्सर बाढ़ (floods), भूस्खलन (landslides) और जलभराव (waterlogging) जैसी समस्याओं को जन्म देती है।
जैसा कि हाल ही में अथिराप्पिल्ली (Athirappally) क्षेत्र में देखा गया जहां रात भर हुई मूसलाधार बारिश से मलक्कापारा (Malakkappara) मार्ग पर जलभराव हो गया और पर्यटन केंद्रों को बंद करना पड़ा, साथ ही मलप्पुरम (Malappuram) के पहाड़ी भागों जैसे ओलिचुपुझा (Olichupuzha) और चोक्कोडुपुझा (Chokkodupuzha) में रात के समय भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं।
आज के लिए पठानमथिट्टा (Pathanamthitta), अलप्पुझा (Alappuzha), कोट्टायम (Kottayam), एर्नाकुलम (Ernakulam), इडुक्की (Idukki) और त्रिशूर (Thrissur) जिलों में ऑरेंज अलर्ट (orange alert) जारी है, जबकि तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram), कोल्लम (Kollam), पलक्कड़ (Palakkad), मलप्पुरम (Malappuram), कोझिकोड (Kozhikode), वायनाड (Wayanad), कन्नूर (Kannur) और कासरगोड (Kasaragod) में येलो अलर्ट (yellow alert) लागू है, कल मंगलवार को पठानमथिट्टा (Pathanamthitta), अलप्पुझा (Alappuzha), कोट्टायम (Kottayam), इडुक्की (Idukki), एर्नाकुलम (Ernakulam), त्रिशूर (Thrissur), पलक्कड़ (Palakkad) और मलप्पुरम (Malappuram) में ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि बुधवार को मलप्पुरम (Malappuram), कोझिकोड (Kozhikode), वायनाड (Wayanad), कन्नूर (Kannur) और कासरगोड (Kasaragod) जैसे उत्तरी जिलों में ऑरेंज अलर्ट की उम्मीद है।
इसके अलावा, केरल तट पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं (strong winds) चलने की संभावना है, जिससे दक्षिणी केरल में समुद्री घुसपैठ (sea incursions) का खतरा बढ़ गया है, और इसी कारण मछुआरों (fishermen) के लिए केरल-लक्षद्वीप (Kerala-Lakshadweep) तटों पर मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मछली उद्योग को प्रभावित कर सकता है।
कुल मिलाकर, यह मौसम पैटर्न केरल की मानसून (monsoon) अवधि का हिस्सा है, जहां सालाना औसत से अधिक वर्षा राज्य को हरा-भरा रखती है लेकिन साथ ही प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम भी बढ़ाती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है ताकि जान-माल की हानि को न्यूनतम रखा जा सके।