असम (Assam) में चाय उत्पादन (Tea Production) इस वर्ष मौसमी अनियमितताओं और कीटों के प्रकोप से गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। असम भारत का प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र है, जहां लगभग 850 पंजीकृत चाय बागान (Tea Gardens) फैले हुए हैं, और यह देश के कुल चाय उत्पादन का बड़ा हिस्सा योगदान देता है।
चाय उद्योग यहां लाखों लोगों की आजीविका का आधार है, और यह दो शताब्दियों से अधिक पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण बढ़ती अनियमित वर्षा (Erratic Rainfall), उच्च तापमान (High Temperatures) और कीटों (Pests) की समस्या ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया है। जून 2025 में चाय उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से वर्षा की कमी और गर्मी की वजह से हुई।
राज्य में वर्षा की स्थिति असंतुलित रही है, जहां जून में लगभग 50 प्रतिशत वर्षा की कमी देखी गई। यह कमी चाय की झाड़ियों (Tea Bushes) पर तनाव पैदा करती है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं और कीटों के हमले के प्रति अधिक संवेदनशील बन जाती हैं। प्रमुख कीटों में रेड स्पाइडर माइट्स (Red Spider Mites), थ्रिप्स (Thrips), लूपर कैटरपिलर्स (Looper Caterpillars) और ग्रीन फ्लाइज (Green Flies) शामिल हैं, जो कुछ क्षेत्रों में गंभीर क्षति पहुंचा रहे हैं।
जुलाई में दिब्रूगढ़ (Dibrugarh) जिले के पुराने चाय बागानों में दिन का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि रात का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा, जो फसल के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ये परिस्थितियां न केवल उत्पादन को कम कर रही हैं, बल्कि चाय की गुणवत्ता पर भी असर डाल रही हैं।
इस स्थिति का आर्थिक प्रभाव व्यापक है, क्योंकि चाय उत्पादन में कमी से निर्यात और स्थानीय बाजार दोनों प्रभावित होते हैं। असम की चाय उद्योग से जुड़े लोग, जैसे मजदूर और बागान मालिक, अपनी आय में कमी महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम का तनाव और कीटों का दबाव एक साथ मिलकर समस्या को और जटिल बना रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, असम के चाय बागान ब्रिटिश काल से विकसित हुए हैं और वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं, लेकिन हाल के वर्षों में जलवायु संबंधी बदलावों ने उत्पादन में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष की गिरावट स्पष्ट रूप से इन कारकों को इंगित करती है।
आगे की संभावनाओं को देखते हुए, चाय उत्पादक अगस्त और सितंबर में अनुकूल मौसम की उम्मीद कर रहे हैं, जो उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने में मदद कर सकता है। हालांकि, लंबी अवधि में जलवायु अनुकूलन रणनीतियों, जैसे बेहतर सिंचाई प्रणालियां और कीट प्रबंधन तकनीकों की आवश्यकता है। कुल मिलाकर, यह स्थिति असम के चाय उद्योग की मजबूती को परीक्षा में डाल रही है, लेकिन समय पर हस्तक्षेप से नुकसान को सीमित किया जा सकता है।