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फ्लैश फ्लड अलर्ट Flash Flood Risk Alert for next 24 hours

भारत में मानसून के मौसम के दौरान फ्लैश फ्लड (flash floods) एक आम खतरा बन जाता है, जो अचानक और तेज बारिश के कारण नदियों, नालों और निचले इलाकों में तेजी से पानी भरने का कारण बनता है। यह पूर्वानुमान भारतीय मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) द्वारा जारी किया गया है, जो अगले 24 घंटों तक यानी 08-08-2025 को 1130 IST तक के लिए फ्लैश फ्लड रिस्क (FFR) का आकलन करता है।

इस प्रकार के पूर्वानुमान स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने में मदद करते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मिट्टी पहले से ही संतृप्त (saturated) हो चुकी है। पूर्वोत्तर भारत, हिमालयी क्षेत्र और पश्चिम बंगाल जैसे इलाके भौगोलिक संरचना और भारी वर्षा के कारण फ्लैश फ्लड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस रिपोर्ट में कम से मध्यम स्तर का जोखिम कुछ विशिष्ट जिलों में संभावित बताया गया है, जहां सतह पर पानी का बहाव (surface runoff) या जलमग्नता (inundation) हो सकती है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त इस चित्र में भारत के ऊपर बादलों की लेटेस्ट स्थिति प्रदर्शित की गयी है।

पूर्वोत्तर भारत में जोखिम (Risk in Northeast India)

पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना के कारण कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है। अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के चांगलांग (Changlang), दिबांग वैली (Dibang Valley), लोहित (Lohit), लोअर दिबांग वैली (Lower Dibang Valley) और अंजाव (Anjaw) जिलों में कुछ वाटरशेड्स (watersheds) और पड़ोसी इलाकों में कम से मध्यम जोखिम की संभावना है।

इसी तरह, असम और मेघालय (Assam & Meghalaya) के डिब्रूगढ़ (Dibrugarh), जोरहाट (Jorhat), सिबसागर (Sibsagar) और टिनसुकिया (Tinsukia) जिलों में भी यही स्थिति है। ये क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) बेसिन के निकट होने के कारण अक्सर बाढ़ की चपेट में आते हैं, और मानसून के दौरान बादलों की फटने जैसी घटनाएं यहां सामान्य हैं।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा (NMMT) क्षेत्रों में भी जोखिम मौजूद है। मणिपुर (Manipur) के बिश्नुपुर (Bishnupur), चंदेल (Chandel), चुराचांदपुर (Churachandpur), सेनापति (Senapati), थौबल (Thoubal) और उखरुल (Ukhrul) जिलों; मिजोरम (Mizoram) के आइजॉल (Aizawl) और चंफाई (Champhai) जिलों; तथा नागालैंड (Nagaland) के दिमापुर (Dimapur), किफिरे (Kiphire), कोहिमा (Kohima), लोंगलेंग (Longleng), मोकोकचुंग (Mokokchung), मोन (Mon), पेरेन (Peren), फेक (Phek), तुएनसांग (Tuensang), वोखा (Wokha) और जुनहेबोटो (Zunheboto) जिलों में कम से मध्यम फ्लैश फ्लड रिस्क की आशंका है।

इन इलाकों में अपेक्षित वर्षा के कारण पूरी तरह संतृप्त मिट्टी और निचले क्षेत्रों में सतह पर पानी का बहाव या जलमग्नता हो सकती है, जो कृषि, परिवहन और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।

गांगेय पश्चिम बंगाल में स्थिति (Situation in Gangetic West Bengal)

गांगेय पश्चिम बंगाल (Gangetic West Bengal) में भी फ्लैश फ्लड का खतरा कुछ जिलों तक सीमित है। मुर्शिदाबाद (Murshidabad), नादिया (Nadia) और उत्तर 24 परगना (North 24 Pargana) जिलों के कुछ वाटरशेड्स और पड़ोसी इलाकों में कम से मध्यम जोखिम संभावित है। यह क्षेत्र गंगा नदी (Ganga River) के मैदानी भाग में स्थित है, जहां भारी वर्षा से नदियों का जल स्तर तेजी से बढ़ सकता है। अपेक्षित बारिश के कारण क्षेत्र की चिंता (Area of Concern – AoC) में संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में सतह पर पानी का बहाव या जलमग्नता हो सकती है। ऐसी स्थितियां अक्सर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से आने वाले चक्रवातों या मानसूनी कम दबाव के कारण उत्पन्न होती हैं, जो स्थानीय समुदायों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती हैं।

हिमालयी क्षेत्रों में जोखिम (Risk in Himalayan Regions)

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) जैसे हिमालयी राज्य फ्लैश फ्लड के लिए विशेष रूप से संवेदनशील हैं, जहां पहाड़ी ढलान और नदियों की तेज धारा खतरे को बढ़ाती है। हिमाचल प्रदेश के शिमला (Shimla) और सिरमौर (Sirmaur) जिलों में कम से मध्यम फ्लैश फ्लड रिस्क की संभावना है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा (Almora), बागेश्वर (Bageshwar), चमोली (Chamoli), चंपावत (Champawat), देहरादून (Dehradun), नैनीताल (Nainital), पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal), पिथौरागढ़ (Pithoragarh), रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) और टिहरी गढ़वाल (Tehri Garhwal) जिलों में भी यही स्थिति है।

इन क्षेत्रों में अपेक्षित वर्षा के कारण क्षेत्र की चिंता में संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में सतह पर पानी का बहाव या जलमग्नता हो सकती है। हिमालयी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड अक्सर बादल फटने (cloudbursts) या ग्लेशियर पिघलने से जुड़े होते हैं, जो पर्यटन और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे नदियों के किनारे से दूर रहें और मौसम अपडेट्स का पालन करें।

निष्कर्ष और सावधानियां (Conclusion and Precautions)

यह 24 घंटों का पूर्वानुमान दर्शाता है कि भारत के विभिन्न भागों में फ्लैश फ्लड का जोखिम मौजूद है, लेकिन यह कम से मध्यम स्तर का है। ऐसे पूर्वानुमानों का उद्देश्य जीवन और संपत्ति की रक्षा करना है, और ये जलवायु परिवर्तन (climate change) के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाते हैं, जहां असामान्य वर्षा पैटर्न बढ़ रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहना चाहिए, आवश्यक आपातकालीन किट तैयार रखनी चाहिए और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। इस प्रकार की जानकारी समय पर साझा करने से आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

IMD Video Bulletin 7 August 2025