Skip to content

उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने से आई तबाही: बाढ़ ने मचाया कहर

उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव (Dharali village) में हाल ही में एक गंभीर प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपाया। मंगलवार को दोपहर करीब साढ़े एक बजे, कीर गाड़ नदी (Kheer Gad stream) में अचानक पानी का स्तर बढ़ने से बाढ़ आ गई, जो बादल फटने (cloudburst) की वजह से हुई। इस घटना ने गांव के बड़े हिस्से को मलबे में बदल दिया, जहां घर, होटल और बाजार पूरी तरह प्रभावित हुए। स्थानीय निवासियों को अचानक आई इस तबाही से बचने के लिए ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी, और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

यह घटना उत्तराखंड की हिमालयी क्षेत्रों में आम हो रही प्राकृतिक आपदाओं का एक और उदाहरण है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, जहां ऊंचे पहाड़ और घने जंगल मौजूद हैं, इसे बादल फटने और अचानक बाढ़ (flash flood) जैसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। मानसून के दौरान भारी बारिश और जलवायु परिवर्तन (climate change) के प्रभाव से ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। धराली गांव हरशिल घाटी (Harshil valley) में स्थित है, जो समुद्र तल से लगभग 9005 फीट की ऊंचाई पर है। यह स्थान गंगोत्री (Gangotri) की तीर्थयात्रा मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां पर्यटक और यात्री रुकते हैं। गांव से हरशिल (Harshil) मात्र 7 किलोमीटर दूर है, जबकि जिला मुख्यालय उत्तरकाशी (Uttarkashi) से दूरी 79 किलोमीटर है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण यहां साल भर सैलानियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन ऐसी आपदाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को गहरा झटका देती हैं।

बाढ़ ने धराली बाजार (Dharali market) को बुरी तरह प्रभावित किया, जहां दुकानें और आवासीय क्षेत्र पानी और मलबे की चपेट में आ गए। अनुमान है कि 20 से 25 होटल और होमस्टे (homestays) क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 5 पूरी तरह नष्ट हो गए। गांव के निवासियों ने अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़ दिए, और कई लोग अभी भी सुरक्षित स्थानों पर हैं। इस आपदा ने न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्थानीय समुदाय की आजीविका को भी प्रभावित किया, क्योंकि पर्यटन यहां की मुख्य आय का स्रोत है।

आपदा के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (State Disaster Response Force – SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF), पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बारिश के बीच चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इन टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में खोजबीन की और संभावित पीड़ितों को सहायता प्रदान की। सरकार की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया ने स्थिति को और बिगड़ने से रोका, हालांकि पूर्ण बहाली में समय लगेगा।

उत्तराखंड में ऐसी घटनाओं का इतिहास रहा है, जहां केदारनाथ (Kedarnath) जैसी त्रासदियां स्मृति में ताजा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन कटाई, अनियोजित निर्माण और जलवायु परिवर्तन इन आपदाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली (early warning systems), सतत विकास और स्थानीय स्तर पर जागरूकता आवश्यक है। धराली की यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति की शक्ति के सामने सावधानी बरतना कितना जरूरी है।