जैविक खेती करने वाले 89.3% किसानों ने नही लगाईं अपने खेतों में आग: के.वी.एम. का सर्वे

जीरकपुर डेस्क

प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय न्यूज़लेटर द गार्डियन में 11 सितम्बर 2021 को तारुणी गांधी की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है जिसमें यह खा गया है कि उत्तर भारत के इलाके में धान के फानों को खेत खाली करने के उद्देश्य से आग लगा दिया जाना एक बहुत बड़ा सरदर्द का कारण है।

पिछले अनेक वर्षों से पंजाब में जैविक खेती का प्रचार प्रसार कर रहे बाबा उमेन्द्र दत्त जी और उनकी संस्था खेती विरासत मिशन का कहना है कि उनके अथक प्रयासों से जिन किसानों ने जैविक खेती करना प्रारंभ किया था उन्होंने अब धान की पराली को अपनी फसलों में मल्चिंग के तौर पर प्रयोग करना शुरू कर दिया है। जिससे उनकी अपने खेतों में आग लगाने की प्रवृति में काफी कमी देखी गयी है।

खेती विरासत मिशन (के.वी.एम.) ने अपने अध्यन के लिए 350 किसानों का सैंपल लिया और यह पाया कि 89.3% प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिन्होंने अपने खेतों में धान की फसल की कटाई के बाद बचे हुए फानों में आग नही लगाईं। कुल सैंपल में से 106 किसान ऐसे थे जिन्होंने अगली फसल में मल्चिंग के तौर पर पराली का उपयोग करना शुरू कर दिया था।

48 किसान ऐसे थे जिन्होंने खाद बनाना शुरू कर दिया था और 47.2% किसान ऐसे थे जिन्होंने यह बताया कि जैविक खेती शुरू करने से पूर्व वे अपने खेतों में से फसल काट लेने के बाद बचे हुए अवशेषों में आग लगा दिया करते थे।

48.7% किसान ऐसे मिले जो जैविक खेती करके बेहद संतुष्ट थे और 34.3% किसान ऐसे मिले जो जैविक खेती करके संतुष्ट थे जबकि जैविक खेती करके ख़ुशी महसूस करने वाले किसानों की संख्या 99% रही।

पंजाब के फरीदकोट जिले के जैतों टाउन में स्थित खेती विरासत मिशन नाम की यह सामाजिक संस्था वर्ष 2005 से पंजाब राज्य में जैविक खेती के प्रचार प्रसार का कार्य कर रही है। संस्था ने अपने सर्वे में यह पाया है कि 98.4% जैविक खेती करने वाले किसानों ने माना है कि जैविक खेती करने से उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिला है।

बाबा उमेन्द्र दत्त जी जो खेती विरासत मिशन के संयोजक हैं ने बताया कि 93.5% जैविक खेती करने वाले किसानों ने यह माना है कि जैविक खेती शुरू करने के बाद सेहत और पर्यावरण में सुधार होने के साथ साथ खेती किसानी मिटटी हवा पानी पशु पक्षियों, कीट पतंगों, वनस्पतियों आदि से जुडी जानकारियों के स्तर में भी बहुत इजाफा हुआ है ।

जब किसानों से यह पूछा गया कि जानकारियों में इजाफा कैसे हुआ तो किसानों ने बताया कि जैविक खेती से उनकी ऑब्जरवेशन पॉवर में और उनकी संवेदनशीलता में सुधार हुआ और उनकी समझ में प्रकृति के रहस्य आने लग गये हैं जिससे उनके आत्मविश्वास में बहुत वृद्धि हुई है।

कीटपतंगों की समझ जैविक खेती की सफलता का राज है और अनेक समस्याओं रुपी ताले की चाबी है। इस सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि 72% किसान ऐसे थे जिन्होंने यह माना कि कीट पतंगों के पार्टी जागरूकता के स्तर में उनकी जानकारियां बहुत अधिक बढ़ी हैं।

खेती विरासत मिशन के सहयोग से कीटाचार्य श्री मनबीर रेढू जी मदद से अनेकों प्रशिक्षण कैम्प का आयोजन किया जा चुका है जिसका नतीजा आज जैविक खेती की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

89.3% जैविक किसानों के द्वारा फसल अवशेषों को आग ना लगा कर उन्हें अगली फसलों में प्रयोग कर लेना यह दर्शाता है कि जैविक किसान ही आने वाले समय में अपने अपने इलाकों में उदहारण बनकर अन्य किसानों का मार्गदर्शन करेंगे

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