अमृतसर के हरमनप्रीत सिंह ने एवोकाडो को बनाया है धान की खेती का विकल्प

हरमनप्रीत सिंह (मोबाइल न. 7009704980) अमृतसर में रहने वाले एक एन.आर.आई किसान हैं जिन्होंने अफ्रीका के रवांडा देश में काम करते हुए एवोकाडो फल की खेती सीखी है l

एवोकाडो फल में पोषक तत्वोँ की मात्रा बहुत ज्यादा होने से इस फल की मांग भारत में निरंतर बढ़ रही है, लेकिन अभी भी यह फल हमारे देश में इम्पोर्ट करके बाहर से मंगाया जाता है l

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की खेती की जगह कुछ किसान इसकी खेती शुरू कर सकते हैं l

हरमनप्रीत सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने नेटवर्क में एवोकाडो फल के 200 पेड़ लगाये हैं इसकी खेती में ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है | हरमनप्रीत सिंह ने पेड़ों की अच्छी मांग को देखते हुए एवोकैडो की नर्सरी तैयार की है जहाँ से वे इच्छुक किसानों को एवोकाडो फल के अच्छे पौधे उपलब्ध करवा रहे हैं l

हरमनप्रीत सिंह जी बताते हैं कि उनके यहाँ लगाए हुए पेड़ों से लगभग 3 क्विंटल फल मिल रहे हैं, जिन्हें वह 400 रुपये किलो के हिसाब से बेच रहे हैं। उनके मुताबिक एवोकाडो जब फल देना शुरू करता है तो, शुरू के दो साल एक पेड़ से 2 किलो फल मिलेंगे, तीसरे साल से यह आंकड़ा 8 किलो फल तक पहुँचेगा और फिर दसवें साल तक यह आपको एक पेड़ लगभग डेढ़ क्विंटल फल देने लगेगा।

एक पेड़ की उम्र लगभग 50 साल होती है और आपको इसकी बहुत ही कम देख-रेख करनी पड़ती है। आमतौर पर एवोकाडो के पौधों को 8 -10  मीटर की दूरी पर लगाते है। एक किल्ले में 40-60 पौधे लगाए जा सकते है।

एवोकाडो की खेती करने के लिए किसान को 8-10 पेड़ों से इस फल की खेती की शुरूआत करनी चाहिए। थोड़ी थोड़ी संख्या में लगाने से एक साथ खर्चे का भार भी नहीं पड़ेगा  l 

हरमनप्रीत कहते हैं, “किसान अगर चाहें तो बीज से भी इसे लगा सकते हैं लेकिन जल्दी नतीजे मिलने के लिए अच्छा है कि वह अच्छी गुणवत्ता के एवेकैडो के पौधे खरीद कर लगाएं।”

आगे हरमनप्रीत सिंह कहते हैं कि दो सालों तक आपको इसकी देखभाल करनी है। कोशिश करें कि इस दौरान आप इसके तने में प्रूनिंग करते रहें ताकि आपको अच्छे फल मिलें।

दो साल बाद जब यह फल देना शुरू करता है तो एवोकाडो के फलों को हल्का-सा कच्चा तोड़ने पर ही ये सही रहते हैं, जब फलों का रंग पर्पल होने लगे तो आपको इन्हें तोड़ लेना चाहिए। एक पेड़ से दस साल की उम्र होने पर 300-400 किलो फल ले सकते है।

धान की फसल को लेकर पंजाब में जमीन में पानी की कमी हो रही है और जमींन भी ख़राब होती जार ही है | उससे बचने के लिए कम पानी में तैयार होने वाली बागवानी की फसलें लेना लाभदायक रहेगा। शुरु के कुछ सालों में जब तक पेड़ बड़े नहीं हो जाते उनके बीच में दूसरी फसल भी ले सकते हैं ।

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