सरसों में शाकाहारी कीट – धौलिया

धौलिया नाम का धौलिया और कालिया रंग का यह कीड़ा सरसों की फसल में पाया जाने वाला एक शाकाहारी कीट है। सरसों की फसल के अलावा यह कीट तोरिया, तारामीरा, बंदगोभी, फूलगोभी व करम कल्ला आदि फसलों में भी पाया जाता है। यह कीट बाजरा, ज्वार, मक्की व कपास की फसल पर भी गुज़ारा कर लेता है। इस बुग्ड़े के प्रौढ़ एवं निम्फ, दोनों ही फसल में पत्तों व कच्ची फलियों से रस चूस कर गुज़ारा करते हैं।

पत्तियों से ज्यादा रस निकल जाने पर वे मुरझा कर सुख भी सकती हैं। फसल की प्रारम्भिक अवस्था में इस कीट का आक्रमण होने पर सरसों की फसल में नुकशान भी हो सकता है। खासकर जब फसल अभी इंच-दो इंच की हो तथा प्रति पौधा कीटों की संख्या 3-4 पायी जाने लगे। इस समय फसल के पत्तों पर सफ़ेद निशान पड़ जाते हैं। इसीलिए शायद किसान इस बुग्ड़े को धौलिया नाम से पुकारने लगे। अंग्रेज इस कीट को Painted bug कहते हैं। जबकि कीट विज्ञानी इसे Bagrada hilaris नाम से पुकारते हैं। वे बताते हैं की इस बुग्ड़े का नाता Hemiptra वंशक्रम से है तथा इसके कुनबे का नाम Pentatomidae है।

इस कीट के जीवन काल में तीन अवस्थाये होती हैं: अंडा; निम्फ व् प्रौढ़। प्रौढ़ मादा अपने जीवनकाल में लगभग 90-100 अंडे देती है। देखने में गोल-गोल इन अण्डों का रंग पीला-पीला सा होता है। अंडे एक-एक करके या गुच्छों में दिए जाते हैं। एक गुछे में 5-8 अंडे हो सकते हैं। मादा अपने ये अंडे पत्तों पर, डालियों पर, फलियों पर या भूमि में देती है। गर्मियों में तो इन अण्डों से चार-पांच दिन में निम्फ निकल आते है जबकि सर्दियों में अधिक समय लगता है।

इस बुग्ड़े के ये निम्फ काले रंग के होता है तथा इनके शारीर पर भूरे व सफ़ेद चकते होते हैं। पूरण विकसित होने पर इनके शारीर की लम्बाई-चौड़ाई 4.0X2.5 मी.मी. होती है। जन्म से लेकर प्रौढ़ के रूप में विकसित होने तक ये निम्फ पांच बार कांजली उतारते हैं।

इस कीट के प्रौढ़ संतरी व सफ़ेद धब्बों के साथ काले रंग के ही होते हैं। देखने में ढ़ाल जैसे दिखाई देते हैं। मादाएं आकार में नरों के मुकाबले बड़ी होती हैं। हरियाणा में चाहे किसी किसान ने मोरनी-मोर के मधुर-मिलन को देखा या न देखा हो पर इस धौलिया बुग्ड़े के रतिरत जोड़े सभी किसानों ने खूब देख रखे हैं।

निडाना के किसानों ने इस बुग्ड़े के प्रौढ़ कभी-कभार मकड़ी के जाले में तो उलझे देखे हैं पर इसको खाने वाले कीड़े नही देखे हैं। यह तो प्रकृति में संभव नही कि इस कीट के परभक्षी, परजीव्याभ, परजीवी व रोगाणु ना हों। पर निडाना के किसानों को इन महानुभावों के दर्शन नहीं हुए हैं। आपको दिखाई दे जाएँ तो जरुर जल्दी से जल्दी सुचना करना।

यह कीट अक्तूबर महीने की शुरुवात में ही दिखाई देने लग जाता है। फसल में इसका ज्यादा प्रकोप अक्तूबर के आखिर में होता है। सरसों की बिजाई अक्तूबर के आखरी सप्ताह में करने से फसल पर इस कीट का प्रकोप कम होता है।

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